स्मार्ट प्रीपेड मीटर, न्यूक्लियर एक्ट के खिलाफ बिजली कर्मियों, ट्रेड यूनियनों व किसान संगठनों ने अपर श्रम आयुक्त लखनऊ को सौंपा ज्ञापन
लखनऊ में बिजली कर्मियों, इंजीनियरों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और किसानों ने किया अपर श्रम आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन
लखनऊ। बिजली के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025, स्मार्ट प्रीपेड मीटर और न्यूक्लियर एक्ट के विरोध में बिजली कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने बुधवार को प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई), केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के इस आंदोलन के तहत लखनऊ में बिजली कर्मियों, इंजीनियरों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और किसानों ने अपर श्रम आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित था।
लखनऊ में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष जी.वी. पटेल, एटक के प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर, इंटक के दिलीप श्रीवास्तव, सीटू के राहुल मिश्रा, यूपी वर्कर्स फ्रंट के दिनकर कपूर, हिन्द मजदूर सभा के अविनाश पाण्डेय, आंगनबाड़ी कर्मी बबीता, ऑल इंडिया किसान सभा के के.आर. यादव, क्रांतिकारी किसान यूनियन के एकादशी यादव, उप्र. किसान सभा के प्रवीन सिंह तथा बीएमएस के दिनेश कुमार ने किया। इस दौरान सैकड़ों बिजली कर्मचारी और किसान मौजूद रहे।
अपर श्रम आयुक्त के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 के जरिए केंद्र सरकार देश के पूरे विद्युत वितरण क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। निजी कंपनियों को सरकारी वितरण नेटवर्क के इस्तेमाल की छूट दी जाएगी, जिससे वे केवल मुनाफे वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करेंगी और कृषि व गरीब उपभोक्ताओं वाले घाटे के क्षेत्र सरकारी वितरण निगमों पर छोड़ दिए जाएंगे। इससे सरकारी विद्युत वितरण कंपनियां आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगी। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस बिल के जरिए बिजली सब्सिडी समाप्त करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिससे बिजली की दरें बढ़ेंगी और किसान व गरीब उपभोक्ता बिजली से वंचित हो सकते हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत प्रदेश के सबसे गरीब 42 जनपद आते हैं और इनके निजीकरण से सबसे ज्यादा असर गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इसके साथ ही उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश है, जिसका बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं के हित में विरोध कर रहे हैं। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 392वें दिन प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने किसानों और ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया।

