सिक्कों के माध्यम से भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतसनातन परम्परा, लोकतंत्र और विरासत पर गौरव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक कोई सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि दुनिया की आंखें खोलने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। यह पुस्तक ढाई हजार वर्ष पुरानी भारतीय विरासत को तथ्य और प्रमाण के साथ वर्तमान पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दृष्टि से यह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव तथ्य एवं प्रमाण के आधार पर अपनी बात विश्व के सामने रखी है, जबकि पाश्चात्य विचारक दो हजार वर्ष से अधिक पुराने इतिहास की जानकारी से वंचित रहे हैं। हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा संकलित 34,000 से अधिक सिक्के भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करते हैं। प्रदर्शनी में तांबे, चांदी और मिश्रित धातुओं से निर्मित ये सिक्के अयोध्या, काशी, मथुरा, कौशांबी सहित षोडश महाजनपदों तथा मौर्य और गुप्त काल की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करते हैं। ये सिक्के तत्कालीन माप-तौल प्रणाली और सुव्यवस्थित अर्थव्यवस्था को समझने का भी अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सिक्के भारत की सनातन परम्परा को व्यक्त करते हैं, जो ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर आधारित है। भारत ने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ विश्व मानवता को मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने कहा कि वैशाली गणराज्य जैसे उदाहरण भारत में लोकतंत्र की प्राचीन परम्परा को सिद्ध करते हैं। प्रधानमंत्री के विजन 2047 के तहत विरासत पर गौरव की अनुभूति कराना प्रमुख लक्ष्य है। यह पुस्तक और सिक्कों की प्रदर्शनी ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, पुस्तक के लेखक देवेन्द्र हाण्डा, हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन अशोक पी. हिंदुजा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

