निजीकरण के विरोध में बिजलीकर्मियों का प्रांतव्यापी आंदोलन 405वें दिन भी जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश का लखनऊ में व्यापक विरोध
लखानऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि पुडुचेरी में बिजली विभाग के निजीकरण का टेंडर निरस्त किए जाने तथा आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बिजली का निजीकरण न करने की स्पष्ट घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त कर देनी चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली विभागों के निजीकरण की घोषणा के बाद लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व पुडुचेरी में बिजली विभाग के निजीकरण हेतु टेंडर जारी किया गया था। निजीकरण की घोषणा के साथ ही पुडुचेरी के बिजली कर्मियों ने संगठित विरोध शुरू कर दिया था।
इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अगस्त 2025 में अदानी पावर कंपनी द्वारा ‘पुडुचेरी अदानी पावर कंपनी लिमिटेड’ का पंजीकरण कराया गया, जिसके बाद निजीकरण की प्रक्रिया को दोबारा तेज किया गया। 05 जनवरी 2026 को नई बिडिंग की अंतिम तिथि निर्धारित थी तथा 06 जनवरी 2026 को टेंडर खोले जाने थे। किंतु 05 जनवरी की शाम को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुडुचेरी बिजली विभाग के निजीकरण का टेंडर निरस्त कर दिया गया।
संघर्ष समिति के संयोजक एवं ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 05 जनवरी 2026 को विजयवाड़ा में आयोजित आंध्र प्रदेश बिजली इंजीनियर्स महासभा में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री रवि कुमार ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि आंध्र प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के विरोध में है और राज्य में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है और वहां निजीकरण का टेंडर रद्द किया जाना केंद्र सरकार की सहमति से हुआ है। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी केंद्र सरकार की प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि बिजली के निजीकरण पर पुनर्विचार की गुंजाइश मौजूद है।
समिति ने मांग की कि जब केंद्र सरकार पुडुचेरी में निजीकरण रोक सकती है और केंद्र सरकार के सहयोगी दल द्वारा शासित आंध्र प्रदेश में निजीकरण नहीं किया जाएगा, तो उत्तर प्रदेश सरकार को भी पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय वापस लेना चाहिए। संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली कर्मियों का निजीकरण विरोधी आंदोलन आज 405वें दिन भी जारी रहा। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जनपदों एवं परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।

