पीडब्लूडी में बिना काम ‘एडवांस भुगतान’ के दबाव के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत

Prashant

March 24, 2026

लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष के अंत में

बजट खपाने के नाम पर बड़े खेल पर कर्मचारी संगठन ने जताई आशंका

लखनऊ। लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष के अंत में बजट खपाने के नाम पर बड़ा खेल होने की कर्मचारी संगठन ने आशंका जताई है। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने विभाग के उच्चाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लिखित शिकायत की है। संघ का आरोप है कि मुख्यालय स्तर पर बजट सरेंडर स्वीकार नहीं किया जा रहा है और कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) व सहायक अभियंताओं (एई) पर नियम विरुद्ध तरीके से ‘एडवांस पेमेंट’ करने का अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है।

इं. एन.डी. द्विवेदी, अध्यक्ष, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने कहा कि नियम विरुद्ध भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। संघ के अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी ने बताया कि कई जनपदों से सूचना मिली है कि अधिशासी अभियंता और उच्चाधिकारी मौखिक आदेश देकर बिना कार्य संपादन या बिना गुणवत्ता परीक्षण के ही भुगतान करने का दबाव बना रहे हैं।

नियमों के अनुसार जो बजट खर्च नहीं हो पाता उसे सरेंडर किया जाना चाहिए, लेकिन मुख्यालय स्तर पर इसे स्वीकार न कर किसी भी तरह खर्च दिखाने को कहा जा रहा है, जो शासकीय धन का सीधा दुरुपयोग है। संगठन ने आरोप लगाया कि वर्तमान में अधिकांश जूनियर इंजीनियरों और सहायक अभियंताओं की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा, जनगणना और एसआईआर में लगी है, जहां ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में बिटुमिनस (सड़क) या सीसी कार्य का गुणवत्ता परीक्षण और मापी (मापन) संभव ही नहीं है।

संघ का कहना है कि वित्तीय स्वीकृतियां और टेंडर प्रक्रिया पूरे साल जानबूझकर लटकायी जाती हैं और अंत में मार्च में बजट खपाने के लिए फील्ड इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया जाता है। इं. एन.डी. द्विवेदी, अध्यक्ष, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने कहा कि  “शासकीय धन की बंदरबांट और गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम विरुद्ध एडवांस भुगतान का दबाव बनाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।”

मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग

संघ ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि इस संबंध में 07 मार्च को ही विभागाध्यक्ष और प्रमुख सचिव को सूचित किया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये और भ्रष्टाचार के दबाव से आहत होकर संघ ने अब सीधे शासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

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