नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान का 104वां स्थापना दिवस मनाया गया

Anoop

December 1, 2025
  • विशेषज्ञों की उपस्थिति में पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह
  • नाइट सफारी सहित संरक्षण और प्रबंधन पर गहन विचार-विमर्श

लखनऊ। नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) के 104वें स्थापना दिवस के अवसर पर 29 नवम्बर 2025 को प्राणी उद्यान परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के समस्त प्राणी उद्यानों लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर एवं इटावा लायन सफारी के भूतपूर्व निदेशकों, भूतपूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षकों (वन्यजीव) तथा वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि सी.पी. गोयल, सदस्य सेंट्रल एम्पावरमेंट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय एवं विशिष्ट अतिथि सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष शामिल रहे।

“104 वें स्थापना वर्ष का यात्रा वृत्त शीर्षक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें प्राणी उद्यान के भूतपूर्व निदेशकों एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षकों के अनुभव लेखों के रूप में संकलित हैं। सभी अतिथियों का तिलक व अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक, प्राणी उद्यान लखनऊ अदिति शर्मा के स्वागत कर किया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रभाकर ने प्राणी उद्यान के इतिहास पर प्रकाश डाला। सुनील चौधरी ने प्रदेश के प्राणी उद्यानों के रखरखाव एवं प्रबंधन पर उद्बोधन दिया।

कुकरैल नाइट सफारी के निदेशक राम कुमार ने प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना पर प्रस्तुतीकरण दिया। सभी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि सी.पी. गोयल ने वन विभाग में कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कुकरैल नाइट सफारी की स्थापना की दिशा में प्रयास किए जाएँ, साथ ही पुरानी धरोहरों का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। अंत में उप निदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

विचार-विमर्श समूहों का गठन

सभी अतिथियों को तीन समूहों में विभाजित कर तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा कराई गई प्राणी उद्यान प्रबंधन में परिवर्तन – समूह नेतृत्व: डी.एन.एस. सुमन (सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव),  संरक्षण एवं संवर्धन के नव आयाम – समूह नेतृत्व: मोहम्मद एहसान (सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव),  वन्यजीव पर्यटन एवं जन-भागीदारी – समूह नेतृत्व: सुनील पाण्डेय (सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष) ने विचार-विमर्श के बाद तीनों समूहों ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुत परिणामों पर प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ। सभी सुझावों को वन विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष नीति-निर्णय के लिए भेजा जाएगा।

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