ठहाकों से गूंजा मंच, ‘द क्लाउन-विदूषक’ ने जीता दर्शकों का दिल

Anoop

November 29, 2025
  • भारतीयम संस्था के 35वें स्थापना वर्ष समारोह में हास्य नाटक का सफल मंचन लेखक-निर्देशक
  • पद्मश्री डी.पी. सिन्हा एवं पद्मश्री राज बिसारिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए1

लखनऊ। भारतीयम संस्था के 35वें स्थापना वर्ष पर शिवांजना स्टूडियो के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय संगीत एवं नाटक समारोह का समापन गुरुवार को गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे जी महाराज ऑडिटोरियम में हास्य नाटक ‘द क्लाउन-विदूषक’ के मंचन से हुआ। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक पुनीत अस्थाना के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को हंसी और व्यंग्य से भरपूर शाम दी। कार्यक्रम की शुरुआत में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं लेखक-निर्देशक पद्मश्री डी.पी. सिन्हा तथा वरिष्ठ रंगकर्मी पद्मश्री राज बिसारिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

चार्ली चैपलिन को समर्पित प्रस्तुति

वि.वा. शिरवाडकर के नाटक ‘विदूषक’ पर आधारित इस नाटक में विश्व प्रसिद्ध विदूषक चार्ली चैपलिन को श्रद्धांजलि दी गई। नाटक का केन्द्रीय पात्र भोलाराम एक सादे और नेकदिल व्यक्ति के रूप में समाज की कठोर परिस्थितियों में हास्य और संवेदना का संगम है।

कहानी का व्यंग्यात्मक पक्ष

बार में वेटर भोलाराम की मुलाकात करोड़पति उद्योगपति राजबहादुर से होती है, जो अत्यंत संवेदनहीन और स्वार्थी है। नशे में उसे डिप्टी मैनेजर की नौकरी देने के बाद हर सुबह वह उसे पहचानने से इनकार कर देता है। इस दौरान भोलाराम कारखाने में दुर्घटना में मारे गए मज़दूर की अंधी बेटी अंजलि की मदद करता है और उसके इलाज के लिए मुआवज़े का चेक हासिल कर उसकी जिंदगी में रोशनी लौटाता है। अंत में अंजलि और भोलाराम का प्रेम भी मुकाम पाता है।

कलाकारों का प्रभावी अभिनय

  • केशव पंडित ने भोलाराम का जीवंत चित्रण किया। राजीव रंजन सिंह ने राजबहादुर के दोहरे व्यक्तित्व को सशक्त रूप से उकेरा, पूजा सिंह ने अंजलि के अंधेपन और भावुकता की भावुकता के किरदार को जीवंत किया। अम्बरीश बॉबी, तुषार बाजपेई ‘शुभम’, रामेन्द्र लाल, ऋतु श्रीवास्तव, कैरा कुन्ती सिंह सहित अन्य कलाकारों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
  • तकनीकी पक्ष में सेट डिज़ाइन: आनन्द अस्थाना, गीत एवं संगीत: राजीव रंजन सिंह और प्रियांक कठेरिया ने, वेशभूषा: रत्ना आनन्द व प्रकाश व्यवस्था: गोविन्द यादव में अहम भूमिका निभाई। नाटक के बहुआयामी प्रस्तुतीकरण, मंच सज्जा और पार्श्व संगीत ने दर्शकों को एक यादगार अनुभव प्रदान किया।

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