लखनऊ में दो दिवसीय ‘राज्य स्तरीय दिव्यांग खेलकूद प्रतियोगिता-2026’ का भव्य शुभारंभ
विभिन्न जिलों के छात्र-छात्राओं ने अपने जोश और जुनून से मैदान में जज्बा दिखाया
लखनऊ। दिव्यांगता शरीर की बाधा हो सकती है, मन के हौसलों की नहीं—इसी संदेश को चरितार्थ करते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय ‘राज्य स्तरीय दिव्यांग खेलकूद प्रतियोगिता-2026′ का भव्य शुभारंभ हुआ। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 550 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपने जोश और जुनून से मैदान में जीत का जज्बा दिखाया।
प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, श्री सुभाष चन्द शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर खेल मशाल को आगे बढ़ाया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इन आयोजनों को और अधिक आधुनिक और समावेशी बनाया जाए ताकि गाँव-गाँव की दिव्यांग प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच मिल सके।
मैदान पर दिखा कड़ा मुकाबला
मोहन रोड स्थित शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय और विशेष राजकीय विद्यालय के खेल मैदानों पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। प्रतियोगिता में मुख्य रूप से तीन श्रेणियों—श्रवण बाधित, दृष्टिबाधित और अन्य श्रेणियों—के बीच प्रतिस्पर्धा हुई।
100 और 200 मीटर की दौड़ में धावकों ने गजब की रफ्तार दिखाई।शॉटपुट और लॉन्ग जंप में खिलाड़ियों ने अपनी शारीरिक शक्ति का लोहा मनवाया।कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों में जबरदस्त टीम तालमेल दिखा, वहीं ‘टग ऑफ वॉर’ (रस्साकशी) के दौरान दर्शकों का उत्साह चरम पर रहा। शतरंज की बिसात पर खिलाड़ियों ने अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
खिलाड़ियों की सुविधा का रखा गया विशेष ध्यान
राजधानी के कड़ाके की ठंड को देखते हुए विभाग द्वारा खिलाड़ियों के आवास, पौष्टिक भोजन और परिवहन की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। मौके पर मेडिकल टीम और फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती भी रही ताकि खिलाड़ियों को किसी भी चोट या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े। खेल समन्वयकों और स्वयंसेवकों की सक्रियता से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और अनुशासित रही।

सशक्तिकरण की नई इबारत
यह आयोजन केवल हार-जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान और सामाजिक मुख्यधारा में उनकी भागीदारी को एक नई मजबूती प्रदान की। विभाग का यह प्रयास दर्शाता है कि यदि अवसर मिले, तो ये दिव्यांग खिलाड़ी देश और दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

