कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा से पीलीभीत तक पहुंची पुलिस, कथित जबरन निकाह की जांच
रेप, जबरन गर्भपात और धर्म परिवर्तन के आरोपों में फास्ट-ट्रैक ट्रायल की तैयारी
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन उर्फ रमीज (31) की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने शनिवार को दो ऐसे अहम लोगों की पहचान की है, जो आगरा की एक महिला के साथ डॉक्टर के कथित पहले जबरन निकाह से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें आरोपी का दोस्त शारिक खान और काज़ी सैय्यद ज़ाहिद हसन शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि यह निकाह महिला की मर्ज़ी के बिना दबाव और ज़बरदस्ती से कराया गया था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और गिरफ्तार डॉक्टर से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर जांच पीलीभीत तक पहुंची है, जहां आगरा की महिला के साथ कथित निकाह होने की बात सामने आ रही है। शारिक खान पर निकाह में गवाह बनने का आरोप है, जबकि काज़ी सैय्यद ज़ाहिद हसन पर शादी कराने की भूमिका निभाने का संदेह जताया जा रहा है। पुलिस टीमें दोनों की तलाश में जुटी हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उन्हें कथित ज़बरदस्ती और गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन की जानकारी थी या नहीं।
आरोपी रमीज को शुक्रवार को पश्चिम लखनऊ सर्विलांस यूनिट और चौक पुलिस की संयुक्त टीम ने सिटी स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। वह 23 दिसंबर से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। रमीज पीलीभीत का निवासी है और लखनऊ व उत्तराखंड में उसके अस्थायी पते बताए जा रहे हैं।
रमीज पर आरोप है कि उसने शादी का झूठा वादा कर एक जूनियर महिला डॉक्टर से बार-बार दुष्कर्म किया, बिना उसकी सहमति के गर्भपात के लिए मजबूर किया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। इसके अलावा आगरा की एक महिला को भी शादी और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद रमीज ने खुद को निर्दोष बताते हुए साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा किया है।
इस मामले में आरोपी के माता-पिता—पिता सलीमउद्दीन (70) और मां खतीजा (67)—को भी 5 जनवरी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की कड़ियों को जोड़ते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है।
डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस एक मजबूत और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले में फास्ट-ट्रैक ट्रायल के लिए अदालत में आवेदन किया जाएगा। डीसीपी ने कहा, “दस्तावेजी, तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि जांच में कोई कमी न रहे। हमारा प्रयास है कि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके।”

