- “काम के बोझ ने तोड़ दिया पापा…” बेटियों का दर्द छलका, दो दिन से थे लापता
- गांव में पसरा मातम, प्रशासन जांच के बाद ही बताएगा मौत की असली वजह
महोबा। महोबा के पवा गांव में एक साधारण शिक्षक की असाधारण और बेहद दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम में लगे शिक्षामित्र शंकरलाल राजपूत (50) का शव गांव के बाहर कुएं में उतराता मिला। दो दिन पहले वह अचानक घर से लापता हो गए थे। जब उनका शव मिला, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया।
शंकरलाल की बेटियां नीलम और अंजलि बेसुध होकर बस यही कहती रहीं— “पापा कई दिनों से बहुत परेशान थे… रात-रात भर काम करते थे, लगातार फोन आते रहते थे… यही दबाव उन्हें हमसे दूर ले गया।” बेटियों का आरोप है कि मतदाता सूची के काम का अत्यधिक दबाव ही उनके पिता की जिंदगी छीन ले गया।
परिजनों के अनुसार, एक दिसंबर को शंकरलाल घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिवार ने रिश्तेदारियों और आसपास के गांवों में खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार दोपहर खेतों की ओर गए ग्रामीणों को कुएं के पास उनकी चप्पल नजर आई। जब झांककर देखा गया तो भीतर शव उतराता दिखाई दिया। यह दृश्य देखकर गांव के लोग सन्न रह गए।
सूचना मिलते ही एसडीएम शिवध्यान पांडेय, नायब तहसीलदार विकास गोयल और थाना श्रीनगर पुलिस मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। थानाध्यक्ष जयचंद्र सिंह ने बताया कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने कहा कि शंकरलाल बीएलओ के साथ सहायक टीम में शामिल थे और उनकी भूमिका सहयोगात्मक थी। प्रशासन का दावा है कि किसी तरह के दबाव की आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है, फिर भी पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।

