उत्तर प्रदेश में अंतर्देशीय जल परिवहन को मिलेगी नई दिशा

Anoop

December 9, 2025

जलमार्ग विकास से पर्यटन और परिवहन दोनों को बढ़ावा: दयाशंकर सिंह

उत्तर प्रदेश में 11 इनलैंड वाटरवेज विकसित होने की अपार संभावनाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की पहली बैठक में परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि अंतर्देशीय जल परिवहन उत्तर प्रदेश के लिए विकास और पर्यटन का नया अवसर है। उन्होंने बताया कि देश में चिन्हित 111 इनलैंड वाटरवेज में से 11 वाटरवेज उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, जो राज्य के लिए अपार संभावनाओं का द्वार खोलते हैं।

सिंह ने बताया कि प्राचीन काल से ही नदियों और जलमार्गों का उपयोग आवागमन और व्यापार के लिए होता रहा है। उन्होंने कहा कि बलिया का सूराहाताल और गोरखपुर का रामगढ़ ताल पर्यटन और जल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण स्थल हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि जल परिवहन प्रदूषण-मुक्त और सुरक्षित यात्रा का विकल्प है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है।

पूर्व सचिव और चेयरमैन टी.के. रामचंद्रन ने कहा कि 2050 तक भारत में इनलैंड वाटरवेज का पूर्ण विकास लक्ष्य है। जलमार्गों के माध्यम से भारी माल परिवहन संभव है, जिससे परिवहन लागत में भारी कमी आएगी। वरिष्ठ मंडल रेल प्रबंधक रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि मल्टीमॉडल कार्गो सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसमें जल, सड़क और रेल तीनों माध्यम जुड़ेंगे।

महानिदेशक पर्यटन राजेश कुमार ने कहा कि जलमार्ग पर्यटन को बढ़ावा देने का भी अवसर हैं। उत्तर प्रदेश टूरिज्म पॉलिसी 2025 के तहत फ्लोटिंग रेस्टोरेंट में निवेश करने वाले निवेशकों को 25% सब्सिडी दी जाएगी। इस प्रकार, अंतर्देशीय जल परिवहन उत्तर प्रदेश में न केवल परिवहन बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास का नया इंजन बनेगा।

इनलैंड वाटरवेज का राष्ट्रीय महत्व और विकास

बैठक में आईडब्ल्यूएआई अध्यक्ष सुनील पालीवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा जलमार्गों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पिछले दस वर्षों में वाराणसी क्षेत्र में वाटरवेज के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि नेशनल वाटरवे-1 (गंगा नदी) उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि 2014 से पहले देश में केवल 5 जलमार्ग विकसित थे, जबकि वर्तमान में 111 जलमार्ग चिन्हित और विकसित किए जा चुके हैं।

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