कार्यक्रम में विद्वानों ने साझा किए विचार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
गुरुद्वारा भाई लालो जी के ‘महाराजा जस्सा सिंह सभागार’ में भव्य कार्यक्रम
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आजाद लेखक कवि सभा की वीआईपी रोड स्थित गुरुद्वारा भाई लालो जी के ‘महाराजा जस्सा सिंह सभागार’ में एक भव्य कार्यक्रम हुआ। इंजीनियर नरेन्द्र सिंह मोंगा की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह का मुख्य उद्देश्य मातृभाषा पंजाबी के उत्थान, प्रचार-प्रसार और इसके अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ स. अजीत सिंह द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। मंच संचालन संयोजक त्रिलोक सिंह बहल और सरबजीत सिंह बख्शीश ने किया। इस अवसर पर ज्ञानी जगजीत सिंह जाचक, नरेन्द्र सिंह मोंगा, सुरिंदर कौर और ज्ञान सिंह धंजल जैसे विद्वानों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की नींव है। इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
समारोह में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। वरिष्ठ रंगकर्मी रजनी जी के निर्देशन में विभिन्न समूहों ने प्रभावशाली नाट्य मंचन के जरिए मातृभाषा के महत्व को दर्शाया। संगीत के क्षेत्र में वडैरा बहनों—रूही कौर और हरलीन कौर—ने अपनी सुरीली आवाज में गीत गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, हरगुन कौर द्वारा प्रस्तुत गीत और कविता पाठ ने कार्यक्रम में समां बांध दिया। इस अवसर पर शहर की कई प्रमुख हस्तियां और संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम डॉ. मनिंदर सिंह सलूजा, डॉ. एच.एस. पाहवा एवं डॉ. अमरजोत सिंह, निर्मल सिंह (अध्यक्ष, गुरुद्वारा आलमबाग), हरपाल सिंह गुलाटी (अध्यक्ष, सिख यंगमेन्ज़ एसोसिएशन), दिलप्रीत सिंह (अध्यक्ष, सिक्खी मेरी पहचान), राजवंत सिंह बग्गा (अध्यक्ष, सिख सेवक जत्था) शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन पर आजाद लेखक कवि सभा की ओर से त्रिलोक सिंह बहल और गुरुद्वारा भाई लालो जी की ओर से ज्ञान सिंह धंजल ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद किया। सभा ने विशेष रूप से गुरुद्वारा प्रबंधन और कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग में सहयोग के लिए स. हरविंदर सिंह आभार व्यक्त किया।

